लॉकडाउन में घर जा रहे एक और मज़दूर की मौत, दिल्ली से बिहार जा रहा था मज़दूर!

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कोरोनावायरस महामारी लाखों लोगों की जान ले चुकी है। दुनिया भर में लोग इस महामारी के कारण अपनी जान गंवा रहे हैं। भारत में भी इस महामारी के कारण काफी लोगों ने जानें गंवाई हैं। लेकिन भारत में एक और चीज़ है जो लोगों की जान ले रही है। वो चीज़ है भूख! भारत में लॉकडाउन के कारण लोग भूख से मर रहे हैं। अभी अभी खबर मिली है कि दिल्ली से बिहार अपने घर जा रहे एक मज़दूर की रास्ते में मौत हो गयी है।

मरने वाले व्यक्ति का नाम धर्मवीर है। धर्मवीर की उम्र 28 साल थी। बिहार के खगड़िया ज़िले में खरेता गाँव से धर्मवीर दिल्ली में दिहाड़ी मज़दूरी करने के लिए आया था। वह अपने परिवार का पेट पालने के लिए रिक्शा भी चलाता था और राज-मजदूरी भी करता था। लॉकडाउन घोषित हो जाने के बाद धर्मवीर और उसके साथियो के पास कोई काम नहीं रहा। कुछ पैसे जो घर भेजने के लिए जोड़ रखे थे उन से कुछ दिन का खाना पीना किया।

लेकिन वो पैसे जल्दी ही ख़त्म हो गए। उसके बाद आस पड़ोस के लोगों से मांग कर अपना पेट भरना शुरू किया। उन्हें उम्मीद थी कि जल्दी ही सब ठीक हो जायेगा और उन्हें फिर से काम मिलने लगेगा। लेकिन उनका इंतज़ार बढ़ता गया। धर्मवीर के एक साथी ने बताया कि दिल्ली में उन्हें कई बार भूखा रहना पड़ता था। दिल्ली सरकार से भी कोई ख़ास मदद नहीं मिली। कई दिन सिर्फ बिस्कुट खा कर गुज़ारे।

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अब धर्मवीर और उसके साथियो के सब्र का बाँध टूटने लगा। जिस लॉकडाउन के उन्हें ख़त्म होने की उम्मीद थी वो लगातार बढ़ता जा रहा था। धर्मवीर और उसके 5 साथियो ने निर्णय लिया कि यहाँ मरने से अच्छा है अपने घर चले जाएं। धर्मवीर और उसके साथी दिल्ली से बिहार के लम्बे सफर पर अपनी साइकिल लेकर निकल पड़े।

4 दिन लगातार भूखे साइकिल चला कर वे शाहजहांपुर पहुँच गए। 4 दिन उन्हें रास्ते में कहीं कोई मदद या खाना नहीं मिला। शाहजहांपुर में उन्हें 4 दिन बाद खाना मिला। खाना खा कर उन्होंने एक रात वहीं सोने का निर्णय लिया। सोने के लिए उन्हें एक जगह मिल गयी जहाँ वे सभी साथी सो गए। अगले दिन उठने के बाद धर्मवीर की तबियत अचानक बिगड़ने लगी।

अपने साथी की तबियत बिगड़ती देख कर वे लोग उसको मेडिकल कॉलेज ले गए। मेडिकल कॉलेज में कुछ देर में ही धर्मवीर ने दम तोड़ दिया। उसके साथियो ने प्रशासन को बताया कि उसको कोई बीमारी नहीं थी। मेडिकल कॉलेज से धर्मवीर के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया और उसके साथियो को क्वारंटाइन कर दिया गया।

धर्मवीर के जैसे ही न जानें कितने गरीब मज़दूर इस लॉकडाउन के कारण मौत का शिकार हो चुके हैं। हमारे देश की सरकार इन गरीब मज़दूरों को उनके घर पहुंचाने या इनको खाना खिलाने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। अभी भी हज़ारो मज़दूर देश के अलग अलग हिस्सों में फंसे हुए हैं। उनके पास न तो खाने के लिए पैसे हैं और न रहने के लिए छत. अब इन लोगों को सरकार पर भरोसा नहीं रहा है इसीलिए ये सब खुद ही अपने घरों की तरफ चल पड़े हैं।

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