Digital Guruji : समाज में बदलाव के नायको को मंच उपलब्ध करवा कर खुशियाँ बाँट रही हैं सुधा यादव

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    सुधा यादव का डिजिटल गुरूजी बनने तक का सफर
    सुधा यादव का डिजिटल गुरूजी बनने तक का सफर

    रेवाड़ी की बेटी सुधा यादव द्वारा संचालित डिजिटल गुरुजी समाज में बदलाव में योगदान देने व्यक्तियों और संगठनों के विचारों को और उनकी कहानियों को लोगो तक पहुँचाने का जरिया बन रही हैं।

    जहां अधिकांश बच्चे किशोर अवस्था में पढ़ाई में या अन्य गतिविधियों में व्यस्त रहते हैं, वहीं दूसरी ओर हरियाणा के रेवाड़ी की रहने वाली सुधा यादव रोजी-रोटी कमाने में व्यस्त थीं और अपनी शिक्षा के वित्तपोषण के अलावा अपने परिवार की मदद कर रही थीं। उस समय उसका एकमात्र उद्देश्य था कि वह अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी हो और वह अपने परिवार का आर्थिक रूप से समर्थन करे।

    सुधा यादव का डिजिटल गुरूजी बनने तक का सफर

    डिजिटल गुरुजी की स्थापना सुधा यादव ने मार्च 2018 में इस उद्देश्य से की थी ताकि लोगों को अपनी कहानियों और विचारों को साझा करने के लिए एक मंच और अवसर मिल सके। हालाँकि, सुधा के लिए यह सफर बहुत आसान नहीं था, उसे बचपन से ही आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। उसके पिता एक छोटे किसान थे और एक कारखाने में मशीन ऑपरेटर के रूप में भी काम करते थे।

    डिजिटल गुरूजी आज बदलाव के असल मगर गुमनाम नायकों को उनकी सही पहचान दिलाने के साथ ही बदलाव की आवाज को बुलंद कर देश के कोने-कोने तक पहुंचा रहा है।

    यहाँ डिजिटल गुरुजी पर हर कोई अपनी समस्याओं का हल खोजने के उद्देश्य से विशेषज्ञों से जुड़ सकता है। जीवन के सभी क्षेत्रों के लोग, छात्र से लेकर पेशेवर किसी भी व्यक्ति को डिजिटल गुरुजी पर अपनी कहानी साझा करने के लिए आगे आ सकते हैं।

    सुधा का प्रयास हैं कि समाज में योगदान देने वाले लोगों की अनकही अनसुनी कहानियों को सामने लाया जाए, जिससे उन्हें पर्याप्त समर्थन और पहचान मिल सके।

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